आज है संकष्टी चतुर्थी, जानिए इस व्रत के लाभ और कथा के बारे में विस्तार से

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कृष्णचतुर्थी हमारे जीवन के समस्त पाप को हरने के लिए दो मार्च 2021 को मंगलवार को सुबह पांच बजकर 46 मिनट से प्रारंभ होकर तीन मार्च 2021, बुधवार को रात्रि 02.59 तक रहेगी।                                   

 [Sankashti Chaturthi ]2021 फाल्गुन मास के चतुर्थी का व्रत अत्यन्त ही कठिन व्रतों मे से एक माना जाता है।

फाल्गुन मास को संवत्सर का अंतिम मास कहा जाता है। तथा आनंद उल्लास इसी मास की देन है तथा प्रेमसंबंधों में वृद्धि का मास फाल्गुन मास है। इस मास में हवा की अधिकता तथा नवीन सृष्टि के पुर्व में स्थित पुराने पत्तो का गिरना तथा इस मास के पश्चात नए पत्तो का आना सृष्टि के सुंदरदृश्य को प्रस्तुत करता है। इस मास की कृष्णचतुर्थी संकष्टीचतुर्थी के नाम से विख्यात है। कहते है|                                                                                         ज्योतिष के मुताबिक, संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी विघ्न बाधाएं दूर होती है| यदि संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़े तो यह अति शुभकारक मानी गई है| मंगलवार के दिन पड़ने वाली  चतुर्थी को अंगारकी  चतुर्थी  भी कहते हैं| गणेश अंगार की  चतुर्थी  का  व्रत  करने  से  पूरे  साल  भर  के  चतुर्थी  व्रत  के  करने  का  फल  प्राप्त  होता  है| इस चतुर्थी को द्विजप्रिय  संकष्टी  चतुर्थी  भी  कहा  गया  है।  जिसका  अर्थ  है|  कठिन समय से मुक्ति पाना’ अर्थात यह चतुर्थी व्रत. तीर्थस्नान. दान. धर्म .दया आदि मुक्ति तथा समस्त  दुखों  से  मुक्ति  दिलाने  वाला  है। ज्योतिष  के  मुताबिक, संकष्टी  चतुर्थी  का  व्रत  करने  से  सभी  विघ्न  बाधाएं  दूर होती  है| यदि  संकष्टी चतुर्थी  मंगलवार को पड़े तो यह अति  शुभकारक  मानी  गई  है|  मंगलवार  के  दिन  पड़ने  वाली  चतुर्थी   को  अंगारकी  चतुर्थी  भी कहते हैं| गणेश  अंगारकी   चतुर्थी  का  व्रत  करने  से पूरे साल  भर  के   चतुर्थी  व्रत   के  करने  का  फल  प्राप्त  होता है|     ज्योतिष के मुताबिक  संकष्टी चतुर्थी  का  व्रत  करने से सभी विघ्न बाधाएं दूर होती है| यदि  संकष्टी चतुर्थी  मंगलवार को  पड़े तो यह  अति  शुभकारक  मानी  गई  है| मंगलवार  के  दिन  पड़ने  वाली  चतुर्थी   को  अंगार की  चतुर्थी  भी  कहते  हैं|  गणेश  अंगारकी  चतुर्थी  का  व्रत  करने  से  पूरे  साल  भर  के  चतुर्थी  व्रत  के करने का फल प्राप्त होता है| ज्योतिष  के मुताबित . संकष्टी चतुर्थी  का  व्रत  करने  से  सभी  विघ्न  बाधाएं  दूर  होती  है| यदि  संकष्टी चतुर्थी  मंगलवार को पड़े तो यह अति शुभकारक मानी गई है| मंगलवार के दिन पड़ने वाली  चतुर्थी को अंगारकी  चतुर्थी  भी कहते हैं| गणेश अंगार की  चतुर्थी  का  व्रत  करने से पूरे साल भर के  चतुर्थी  व्रत के करने का फल प्राप्त होता  है| ज्योतिष  के  मुताबिक, संकष्टी चतुर्थी  का  व्रत करने से सभी विघ्न बाधाएं दूर होती  है| यदि  संकष्टी चतुर्थी  मंगलवार को  पड़े  तो यह  अति  शुभकारक मानी  गई  है| मंगलवार  के  दिन  पड़ने  वाली  चतुर्थी  को  अंगारकी  चतुर्थी  भी कहते  हैं| गणेश  अंगारकी  चतुर्थी  का  व्रत  करने  से  पूरे  साल  भर  के  चतुर्थी  व्रत  के  करने  का  फल  प्राप्त होता  है|  ज्योतिष  के  मुताबिक.  संकष्टी चतुर्थी  का  व्रत  करने  से  सभी  विघ्न  बाधाएं  दूर  होती  है| यदि  संकष्टी चतुर्थी  मंगलवार  को  पड़े  तो  यह  अति  शुभकारक  मानी  गई  है| मंगलवार  के  दिन  पड़ने  वाली  चतुर्थी  को  अंगारकी  चतुर्थी  भी  कहते  हैं| गणेश अंगार की  चतुर्थी  का  व्रत  करने  से पूरे  साल  भर  के  चतुर्थी व्रत  के  करने  का  फल  प्राप्त  होता  है  इस  बार  कृष्णचतुर्थी  हमारे  जीवन के  समस्त  पाप  को  हरने  के  लिए  दो मार्च 2021 को   मंगलवार  को  सुबह  पांच  बजकर  46 मिनट  से  प्रारंभ  होकर  तीन  मार्च  2021, बुधवार को रात्रि  02.59 तक रहेगी।                                                                                                     संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा                                                                                                        एक बार माता पार्वती और भगवान शिव नदी के पास बैठे हुए थे, तभी अचानक माता पार्वती ने चौपड़ खेलने की इच्छा प्रकट की। मगर, समस्या यह थी कि वहां उन दोनों के अलावा तीसरा कोई नहीं था, जो खेल में निर्णायक की भूमिका निभाए।इस समस्या का समाधान निकालते हुए शिव और पार्वती ने मिलकर एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और उसमें जान डाल दी। मिट्टी से बने बालक को दोनों ने यह आदेश दिया कि तुम खेल को अच्छी तरह से देखना और यह फैसला करना कि कौन जीता। खेल शुरू हुआ, जिसमें माता पार्वती बार-बार भगवान शिव को मात देकर विजयी हो रही थीं। खेल चलता रहा, लेकिन एक बार गलती से बालक ने माता पार्वती को हारा हुआ घोषित कर दिया। बालक की इस गलती ने माता पार्वती को बहुत क्रोधित कर दिया, जिसकी वजह से गुस्से में आकर बालक को श्राप दे दिया और वह लंगड़ा हो गया। बालक ने अपनी भूल के लिए माता से बहुत क्षमा मांगी और उसे माफ कर देने को कहा।बालक के बार-बार निवेदन को देखते हुए माता ने कहा कि अब श्राप वापस तो नहीं हो सकता, लेकिन वह एक उपाय बता सकती हैं, जिससे वह श्राप से मुक्ति पा सकेगा |माता ने कहा कि संकष्टी वाले दिन पूजा करने इस जगह पर कुछ कन्याएं आती हैं। तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और उस व्रत को सच्चे मन से करना। बालक ने व्रत की विधि को जानकर पूरी श्रद्धापूर्वक और विधि अनुसार उसे किया। उसकी सच्ची आराधना से भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उसकी इच्छा पूछी। बालक ने माता पार्वती और भगवान शिव के पास जाने की अपनी इच्छा प्रकट की भगवान गणेश ने उस बालक की इच्छा पूरा कर दिया और उसे शिवलोक पंहुचा दिया, लेकिन जब वह पहुंचा तो वहां उसे केवल भगवान शिव ही मिले माता पार्वती भगवान शिव से नाराज होकर कैलाश छोड़कर चली गई थीं। जब भगवान शिव ने उस बच्चे से पूछा कि तुम यहां कैसे आए, तो उसने उन्हें बताया कि भगवान गणेश की पूजा से उसे यह वरदान प्राप्त हुआ है। यह जानने के बाद भगवान शिव ने भी पार्वती को मनाने के लिए उस व्रत को किया, जिसके बाद माता पार्वती भगवान शिव से प्रसन्न हो कर वापस कैलाश लौट आईं।

 

                    

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