हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण पर लगाई रोक |

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आरक्षण प्रक्रिया पर रोक -सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार- मंत्री भूपेंद्र सिंह ने दी SLP दायर करने की मंजूरी लटक सकते हैं निकाय चुनाव

सुप्रीम कोर्ट यदि हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराती है तो सभी नगरीय निकायों में महापौर-अध्यक्ष के लिए फिर से होगा आरक्षण

मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के पहले महापौर और अध्यक्षों के आरक्षण को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट की पीठ के फैसले दिया है वही सरकार भी इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जयगो इसके लिए सरकार जल्दी ही विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेगी नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति दे दी है सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट यदि हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया जाता है तो सभी नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष पद के लिए फिर से आरक्षण होगा

सरकार का मानना है कि महापौर और अध्यक्षों के लिए आरक्षण 1994 में नियम बने थे उसके अनुसार ही आरक्षण किया है पिछले साल 10 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन में किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं है सरकार को लगता है कि आरक्षण प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं की गई है और कोर्ट इस स्थिति में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। ऐसे में सरकार सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर कर रही है

ग्वालियर हाईकोर्ट ने महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण पर लगाई रोक, कहा- रोटेशन प्रोसेस का पालन नहीं किया

हाईकोर्ट का आदेश
एडवोकेट मानवर्धन सिंह तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शील नागू और जस्टिस आनंद पाठक की डिवीजन बेंच ने कहा कि अभी रोटेशन पद्धति की अनदेखी करते हुए अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण किया गया है इससे एक वर्ग का व्यक्ति लगातार दो बार चुनाव लड़ सकेगा और गैर आरक्षित वर्ग के व्यक्ति को प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं मिलेगा इसलिए इस पर अंतरिम रोक लगाई जाती है

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