कोविड संक्रमण के भय से प्रशासन ने तोड़ दिया पुल, जान जोखिम में डालकर पार कर रहे लोग

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मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में कोरोना संक्रमण और अधिक न फैले इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने चंबल नदी पर बना पांटून पुल को तोड़ दिया गया है आपको बता दे की चंबल नदी के किनारे बसे 130 गांव बसे है उन लोगो को अब आने जाने  में काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है चंबल नदी के उस और बसे गांव वासियों के आने और जाने का यही चंबल नदी पांटून पुल ही एक रास्ता है अगर गांव वासी कही और से आना जाना करते है तो उनको कम से कम 100 km . किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है लेकिन गांव वासी इतना लम्बा रास्ता तय नही करना चाहते इसलिए वह अपनी जन को जोखिम में डालकर लकड़ी के पट्टे को नदी में डाल रहे हैं और उसी के सहारे नदी पार कर रहें हैं । आपको बता दे की चंबल  नदी के इस और मध्य प्रदेश की सीमा है और उस और उत्तरप्रदेश की सीमा लगती है और चंबल नदी के दिनो किनारों पर लग भग 130 गांव वसे है और दोनों और गांव वासियों की इस गांव से उस गांव रिश्तेदारी है।और गांव के लोगो के लिए आवागमन का यही एकमात्र साधन पांटून पुल के जरिए वे कहीं भी आना जाना करते थे। लेकिन कोरोना काल में पुल पर आवागमन रोकने के लिए दोनों साइड से स्लीपर हटा दिए गए हैं। जिससे लोग मध्यप्रदेश और यूपी की सीमा में प्रवेश न कर सकें।

इससे पहले इस पुल से बाइक और हल्के चार पहिया वाहन निकल रहे थे। लेकिन अब पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि कोरोना काल में बसों का आवागमन पूरी तरह बंद है। मध्य प्रदेश यूपी की सीमा में पांटून पुल में आवागमन बंद करने के लिए पुल के दोनों तरफ से 2-2 पाईप हटा दिए गऐ है   पुल व नदी घाट के बीच 10 फीट चौड़ी जगह खाली हो गई है। यहां 10 फीट गहरा पानी है। लोग इसी में लकड़ी के पट्टे डालकर अपनी जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि कोरोना काल में पांटून पुल को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था, जल्द ही पांटून पुल का पुनः निर्माण कर आवागमन शुरू किया जाएगा।

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