श्री कृष्ण जन्माष्टमी कल, पूजा से पहले पढ़ें भगवान की यह स्तुति>

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Shri Krishna Janmashtami 2021 : किसी भी व्रत की पूजा में भगवान की स्तुति भी एक महत्वपूर्ण भाग होती है। माना जाता है कि भगवान स्तुति-वंदना करने से जल्दी प्रसन्न होते हैं। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, पूजा के अंत में भगवान से पूजा में हुई किसी भी प्रकार त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना और आरती की जाती है। लेकिन देवताओं की पूजा से पहले उनकी स्तुति की जाती है। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्स के दौरान सबसे पहले स्तुति की जाएगी इसके साथ ही अभिषेक, पूजा और आरती का क्रम चलता है। यहां पढ़ें भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति-

भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति :
श्री कृष्ण चन्द्र कृपालु भजमन, नन्द नन्दन सुन्दरम्।
अशरण शरण भव भय हरण, आनन्द घन राधा वरम्॥

सिर मोर मुकुट विचित्र मणिमय, मकर कुण्डल धारिणम्।
मुख चन्द्र द्विति नख चन्द्र द्विति, पुष्पित निकुंजविहरिणम।।

मुस्कान मुनि मन मोहिनी, चितवन चपल वपु नटवरम।
वन माल ललित कपोल मृदु, अधरन मधुर मुरली धरम।।

वृषभान नंदिनी वामदिशि, शोभित सुभग सिहासनम।
ललितादि सखी जिन सेवहि करि चवर छत्र उपासनम।।

(हरे कृष्ण, हरे कृष्ण)

श्री नारायण स्तुति :
नारायण नारायण जय गोविंद हरे ॥
नारायण नारायण जय गोपाल हरे ॥

करुणापारावारा वरुणालयगम्भीरा ॥
घननीरदसंकाशा कृतकलिकल्मषनाशा ॥

यमुनातीरविहारा धृतकौस्तुभमणिहारा ॥
पीताम्बरपरिधाना सुरकल्याणनिधाना ॥

मंजुलगुंजाभूषा मायामानुषवेषा ॥
राधाऽधरमधुरसिका रजनीकरकुलतिलका ॥

मुरलीगानविनोदा वेदस्तुतभूपादा ॥
बर्हिनिवर्हापीडा नटनाटकफणिक्रीडा ॥

वारिजभूषाभरणा राजिवरुक्मिणिरमणा ॥
जलरुहदलनिभनेत्रा जगदारम्भकसूत्रा ॥

पातकरजनीसंहर करुणालय मामुद्धर ॥
अधबकक्षयकंसारे केशव कृष्ण मुरारे ॥
हाटकनिभपीताम्बर अभयं कुरु मे मावर ॥
दशरथराजकुमारा दानवमदस्रंहारा ॥

गोवर्धनगिरिरमणा गोपीमानसहरणा ॥
शरयूतीरविहारासज्जनऋषिमन्दारा ॥

विश्वामित्रमखत्रा विविधपरासुचरित्रा ॥
ध्वजवज्रांकुशपादा धरणीसुतस्रहमोदा ॥

जनकसुताप्रतिपाला जय जय संसृतिलीला ॥
दशरथवाग्घृतिभारा दण्डकवनसंचारा ॥

मुष्टिकचाणूरसंहारा मुनिमानसविहारा ॥
वालिविनिग्रहशौर्या वरसुग्रीवहितार्या ॥

मां मुरलीकर धीवर पालय पालय श्रीधर ॥
जलनिधिबन्धनधीरा रावणकण्ठविदारा ॥

ताटीमददलनाढ्या नटगुणविविधधनाढ्या ॥
गौतमपत्नीपूजन करुणाघनावलोकन ॥

स्रम्भ्रमसीताहारा साकेतपुरविहारा ॥
अचलोद्घृतिञ्चत्कर भक्तानुग्रहतत्पर ॥

नैगमगानविनोदा रक्षःसुतप्रह्लादा ॥
भारतियतिवरशंकर नामामृतमखिलान्तर ॥

। इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं नारायणस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌ । 

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